एकता में बल: संगठन की शक्ति
शीर्षक: एकता में बल एक समय की बात है, एक गाँव में एक बूढ़ा किसान रहता था। उसके चार बेटे थे, जो आपस में हमेशा लड़ते रहते थे। किसान इस बात से बहुत दुखी रहता था। उसने उन्हें समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन सब बेकार रहा। एक दिन किसान ने एक तरकीब सोची। उसने अपने चारों बेटों को बुलाया और उन्हें लकड़ियों का एक गट्ठर दिया। उसने कहा, "जो भी इस गट्ठर को तोड़ेगा, उसे मैं इनाम दूँगा।" चारों बेटों ने बारी-बारी से पूरी ताकत लगाई, लेकिन कोई भी उस गट्ठर को नहीं तोड़ सका। फिर किसान ने गट्ठर खोल दिया और एक-एक लकड़ी अपने बेटों को दी। इस बार सभी ने आसानी से लकड़ी तोड़ दी। किसान ने मुस्कुराते हुए कहा, "मेरे बच्चों, अगर तुम इन लकड़ियों की तरह मिल-जुलकर रहोगे, तो कोई तुम्हें नुकसान नहीं पहुँचा पाएगा। लेकिन अगर तुम अलग-अलग रहोगे, तो कोई भी तुम्हें आसानी से तोड़ देगा।" बेटों को अपनी गलती समझ आ गई और उन्होंने फिर कभी न लड़ने की कसम खाई। सीख: एकता में ही शक्ति है।

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