हाथी और बाघ: ताकत बनाम एकता (The Elephant and The Tiger
यहाँ हाथी और बाघ की एक रोमांचक कहानी दी गई है:
हाथी और बाघ: ताकत बनाम एकता (The Elephant and The Tiger)
एक घने जंगल में शेरू नाम का एक बहुत ही अभिमानी बाघ रहता था। उसे अपनी फुर्ती और शिकार करने की कला पर बहुत घमंड था। उसी जंगल में गजराज नाम का एक शांत स्वभाव का हाथी भी रहता था।
एक दिन जंगल में भयंकर सूखा पड़ा। पानी की तलाश में सभी जानवर इधर-उधर भटक रहे थे। तभी शेरू बाघ को एक छोटा सा पानी का गड्ढा दिखा। वह वहाँ पानी पीने पहुँचा, लेकिन वहाँ पहले से ही गजराज हाथी और उसका परिवार पानी पी रहा था।
शेरू ने दहाड़ते हुए कहा, "हट जाओ मेरे रास्ते से! पहले जंगल का राजा पानी पियेगा।"
गजराज ने शांति से उत्तर दिया, "शेरू, इस सूखे में हम सबको मिलकर रहना चाहिए। यहाँ पानी बहुत कम है, सबको थोड़ा-थोड़ा मिल सकता है।"
शेरू को गुस्सा आ गया और उसने गजराज पर हमला करने की कोशिश की। लेकिन गजराज ने अपनी भारी सूँढ़ से शेरू को एक तरफ धकेल दिया। शेरू समझ गया कि हाथी की ताकत के सामने वह अकेला कुछ नहीं कर सकता।
तभी अचानक, कुछ शिकारियों ने जंगल में जाल बिछा दिया। शेरू अपनी जल्दबाजी में उस जाल में फँस गया। वह ज़ोर-ज़ोर से मदद के लिए चिल्लाने लगा। सभी छोटे जानवर डर कर भाग गए, लेकिन गजराज वहाँ रुका। उसने अपनी ताकत का सही इस्तेमाल किया और अपनी सूँढ़ व पैरों से जाल को फाड़ दिया।
शेरू की जान बच गई। उसने शर्मिंदा होकर गजराज से माफी माँगी और कहा, "मुझे समझ आ गया कि असली ताकत दूसरों को डराने में नहीं, बल्कि उनकी मदद करने में है।"
शिक्षा (Moral):
शक्ति का अहंकार कभी नहीं करना चाहिए। मुसीबत के समय एकता और दयालुता ही सबसे बड़ी ताकत होती है।
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