मगरमच्छ और दरियाई घोड़े की अनूठी दोस्ती (The Crocodile and the Hippo)

एक बहुत बड़ी और गहरी नदी थी। उस नदी के एक किनारे पर मक्खू नाम का एक मगरमच्छ रहता था, जो बहुत गुस्सैल और लालची था। वह नदी के हर जानवर को डराता था। उसी नदी के दूसरे किनारे पर भोला नाम का एक दरियाई घोड़ा (हिप्पो) रहता था। भोला स्वभाव से शांत था, लेकिन बहुत ताकतवर था। एक दिन, नदी में मछलियाँ कम हो गईं। मक्खू मगरमच्छ को बहुत भूख लगी थी। उसने सोचा, "यह दरियाई घोड़ा रोज़ शांति से घास चरता है और नदी के बीच में आराम करता है। क्यों न मैं इसे यहाँ से भगा दूँ और पूरी नदी पर कब्ज़ा कर लूँ?" मक्खू ने भोला के पास जाकर दहाड़ लगाई, "भोला! यह मेरा इलाका है। यहाँ से चले जाओ वरना मैं तुम्हें काट लूँगा!" भोला मुस्कुराया और बोला, "मक्खू भाई, नदी बहुत बड़ी है। हम दोनों यहाँ आराम से रह सकते हैं। लड़ने का क्या फायदा?" लेकिन मक्खू नहीं माना। उसने भोला पर हमला करने की कोशिश की। जैसे ही मक्खू ने अपना बड़ा मुँह खोला, भोला ने अपनी भारी देह से पानी में एक ज़ोरदार छलांग लगाई। पानी की इतनी तेज़ लहर उठी कि मक्खू दूर किनारे पर जा गिरा। तभी अचानक वहां कुछ शिकारी आ गए। उन्होंने नदी के किनारे जाल बिछा रखा था। मक्खू किनारे पर फँस गया और ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगा, "बचाओ! बचाओ!" भोला ने देखा कि उसका पड़ोसी मुसीबत में है। वह तेज़ी से तैरता हुआ आया और अपनी मज़बूत दांतों से शिकारियों का जाल काट दिया। शिकारी डरकर भाग गए। मक्खू की जान बच गई थी। उसे अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने भोला से माफ़ी मांगी और कहा, "मुझे माफ़ कर दो दोस्त। मैंने सोचा था कि मेरी ताकत ही सब कुछ है, लेकिन तुम्हारी दया और समझदारी ने आज मुझे बचा लिया।" उस दिन के बाद से, मक्खू मगरमच्छ और भोला हिप्पो नदी के पक्के दोस्त बन गए। अब वे साथ में शिकारियों से नदी की रक्षा करते थे। शिक्षा (Moral): दुश्मनी करने से अच्छा है कि हम मिल-जुलकर रहें। मुसीबत में काम आने वाला ही सच्चा मित्र होता है। क्या आप चाहते हैं कि मैं इस कहानी को छोटा करूँ या इसमें मछली या कछुआ जैसा कोई तीसरा पात्र जोड़ूँ?

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