संगति का असर: दो तोतों की दास्तान | Best Moral Story in Hindi 2026
संगति का असर: दो तोतों की दास्तान
एक पुराने बरगद के पेड़ के नीचे बैठी दादी माँ बच्चों को एक गहरा सबक सिखा रही थीं। उन्होंने पेड़ पर बैठे एक चमकते हुए हरे तोते की ओर इशारा करते हुए अपनी कहानी शुरू की।
बहुत समय पहले, एक पहाड़ी पर दो जुड़वां तोते रहते थे। एक भयानक तूफान आया और दोनों भाई एक-दूसरे से बिछड़ गए। हवा के झोंकों ने एक तोते को एक पवित्र आश्रम के पास गिरा दिया, जहाँ ऋषि-मुनि ध्यान लगाते थे। दूसरा तोता उड़ते-उड़ते डाकुओं की एक अंधेरी गुफा के पास जा गिरा।
समय बीतता गया। आश्रम में रहने वाला तोता रोज़ सुबह वेदों के मंत्र और शांति के संदेश सुनता। वह आने-जाने वाले यात्रियों का स्वागत करता और कहता, "पधारिये श्रीमान, जल ग्रहण कीजिये और विश्राम कीजिये।" उसकी बोली में शहद जैसी मिठास थी।
दूसरी ओर, गुफा में रहने वाला तोता दिन-भर डाकुओं की चीख-पुकार और गाली-गलौज सुनता। जब भी कोई वहां से गुज़रता, वह चिल्लाता, "पकड़ो! मारो! इसे लूट लो! इसके पास बहुत धन है!" उसकी आवाज़ में कड़वाहट और क्रोध था।
एक दिन एक थका हुआ राही पहले गुफा के पास से गुज़रा। तोते की भयानक आवाज़ सुनकर वह डर गया और भाग निकला। फिर वह चलते-चलते आश्रम पहुँचा। वहाँ के तोते ने बड़े प्यार से उसका स्वागत किया। राही हैरान था कि एक ही जैसे दिखने वाले दो पक्षियों के व्यवहार में इतना अंतर क्यों है?
दादी माँ ने मुस्कुराते हुए बच्चों को समझाया, "बच्चों, हम वही बनते हैं जैसा हम अपने आस-पास देखते और सुनते हैं। अच्छी संगति हमें फूल की तरह महकाती है, और बुरी संगति काँटों की तरह चुभती है।"
तस्वीर में बैठे बच्चे मंत्रमुग्ध होकर सुन रहे थे, मानों वे भी उन तोतों की बोली को महसूस कर रहे हों।

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