कहानी: घमंडी मगरमच्छ और समझदार कछुआ
कहानी: घमंडी मगरमच्छ और समझदार कछुआ
एक बड़े तालाब में एक मगरमच्छ रहता था। उसे अपनी ताकत और फुर्ती पर बहुत घमंड था। वह अक्सर तालाब के अन्य जीवों को डराता और उनका मजाक उड़ाता था। उसी तालाब के किनारे एक छोटा और शांत कछुआ भी रहता था।
एक दिन मगरमच्छ ने कछुए से कहा, "तुम कितने धीरे चलते हो! अगर हम रेस लगाएं, तो मैं तुम्हें एक पल में हरा दूंगा।"
कछुआ मुस्कुराया और बोला, "ताकत और गति ही सब कुछ नहीं होती, मित्र। चलिए, कल सुबह रेस लगाते हैं।"
अगले दिन रेस शुरू हुई। मगरमच्छ तेजी से तैरते हुए बहुत आगे निकल गया। उसने पीछे मुड़कर देखा तो कछुआ कहीं नजर नहीं आ रहा था। मगरमच्छ ने सोचा, "यह कछुआ तो अभी बहुत पीछे होगा, क्यों न मैं थोड़ी देर इस धूप में सो जाऊं।" वह किनारे पर गहरी नींद में सो गया।
कछुआ धीरे-धीरे, बिना रुके अपनी मंजिल की ओर बढ़ता रहा। वह चुपचाप सोए हुए मगरमच्छ के पास से गुजर गया और फिनिशिंग लाइन तक पहुँच गया। जब मगरमच्छ की नींद खुली, तो वह तेजी से भागा, लेकिन उसने देखा कि कछुआ पहले से ही वहां मौजूद था और सब उसे बधाई दे रहे थे।
मगरमच्छ का घमंड चूर-चूर हो गया। उसने कछुए से माफी मांगी और समझ गया कि धीमी और निरंतर चाल ही जीत दिलाती है।

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