चालाक लोमड़ी – यानी चतुर और चालाक लोमड़ी।

एक दिन एक लोमड़ी एक चीतों के समूह में शामिल हो गई। लोमड़ी बहुत चतुर थी, लेकिन चीतों के बीच में वह अपनी पहचान खो बैठी। उसे लगा कि अगर वह चीतों जैसा दिखने लगे तो उसे कोई न पहचान पाएगा। उसने अपनी चालाकी से चीतों के बीच घुलने की कोशिश की, लेकिन उसका धोखा जल्द ही पकड़ में आ गया। चीते ने लोमड़ी की पहचान को पहचाना और उसे बाहर कर दिया। लोमड़ी को समझ में आया कि धोखा कभी भी सफल नहीं होता और अपनी असली पहचान को छिपाना अच्छा नहीं होता। मूल शिक्षा: धोखा देने से हमेशा नुकसान होता है। अपनी असली पहचान को छिपाना या बदलना कभी अच्छा नहीं होता, हमेशा सच्चे और ईमानदार रहना

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